रुड़की के स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन, बजट 2026 और नई शिक्षा नीति पर हुई चर्च
रुड़की। स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रुड़की (हरिद्वार) में 06 मार्च 2026 को अर्थशास्त्र विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को वर्तमान आर्थिक परिदृश्य तथा नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डी.एन. (पी.जी.) कॉलेज, गुलावठी, बुलंदशहर के सहायक प्रोफेसर डॉ. भव्यनीत सिंह बत्रा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने “Decoding Indian Budget 2026: Priorities, Promises, Prospects” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए बजट 2026 की प्रमुख प्राथमिकताओं, सरकार की आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल भाषा में बजट की मूल अवधारणाओं को समझाते हुए बताया कि यह बजट रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डी.ए.वी. कॉलेज, मुजफ्फरनगर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र पाल ने “NEP 2020: Transforming Indian Education for the 21st Century” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों, उसकी संरचना और शिक्षा प्रणाली में होने वाले व्यापक बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कौशल विकास और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देती है तथा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विकास कुमार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन और बौद्धिक विकास में अहम भूमिका निभाती हैं तथा विद्यार्थियों को समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेकर समसामयिक विषयों की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. रेनू कुमारी के निर्देशन में किया गया, जबकि सह-संयोजक डॉ. अमित कुमार ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए और उन्हें अपने विचार साझा करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की ओर से दोनों वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस प्रकार यह संगोष्ठी ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रही, जिसने विद्यार्थियों को आर्थिक नीतियों और नई शिक्षा नीति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
