
भगवानपुर (सुमित कुमार)। तहसील भगवानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहां नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे ‘सम्राट कॉम्प्लेक्स’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि इस निर्माणाधीन बिल्डिंग पर एचआरडीए (HRDA) विभाग द्वारा एक-दो नहीं बल्कि तीन बार सील लगाई गई, इसके बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी रहा और आज पूरी इमारत बनकर तैयार खड़ी है।

मामला तब सुर्खियों में आया जब एक रिटायर्ड फौजी युवक ने विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिकायतकर्ता ने मीडिया के सामने दो तस्वीरें भी पेश की हैं—पहली तस्वीर उस समय की है जब बिल्डिंग पर सील लगाई गई थी और निर्माण अधूरा था, जबकि दूसरी हालिया तस्वीर में वही बिल्डिंग पूरी तरह तैयार नजर आ रही है। ये तस्वीरें प्रशासनिक कार्रवाई की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

फौजी शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने एचआरडीए के अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मैंने देश के लिए सेवा की है, लेकिन अब अपने ही सिस्टम के भ्रष्टाचार से लड़ना पड़ रहा है।” उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एचआरडीए के फील्ड अधिकारियों, खासकर जूनियर इंजीनियर (JE) और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल यह है कि आखिर किसकी शह पर सील के बावजूद निर्माण कार्य पूरा हो गया? क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?
अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री के ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच इस मामले में क्या सख्त कार्रवाई होती है, या फिर रसूखदारों के आगे नियम-कानून यूं ही दम तोड़ते रहेंगे।


