इमलीखेड़ा/माजरी (अनुज कुमार)। माजरी गांव में फैल रही लिम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के बीच पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बीमारी की सूचना देने और अधिकारियों से लगातार संपर्क करने के बावजूद विभाग ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते संक्रमण गांव में तेजी से फैलता रहा।

ग्रामीण सुमित सैनी ने बताया कि गांव में कई पशुओं में लिम्पी बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद उन्होंने संबंधित उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को कई बार फोन कर स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया, लेकिन उनकी शिकायतों पर तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा फोन तक नहीं उठाया गया, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।

सुमित सैनी के अनुसार शिकायत के बाद विभाग की ओर से एक चिकित्सको की टीम गांव पहुंचीं, लेकिन उन्होंने केवल तीन पशुओं का टीकाकरण किया और वापस लौट गईं। ग्रामीणों का कहना है। कि जब गांव में बड़ी संख्या में पशु बीमारी की चपेट में थे, तब केवल औपचारिकता निभाकर लौट जाना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने पर सुमित सैनी ने देहरादून स्थित पशुपालन विभाग के निदेशक से सीधे संपर्क कर पूरी स्थिति की जानकारी दी। निदेशक के हस्तक्षेप और मामले का संज्ञान लेने के बाद विभाग हरकत में आया तथा गांव में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसके तहत बड़ी संख्या में पशुओं का टीकाकरण कर बीमारी की रोकथाम के प्रयास किए गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग शुरुआत में ही सक्रियता दिखाता तो बीमारी के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में नियमित पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने, पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराने तथा लिम्पी बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है और विभागीय लापरवाही का सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
