स्कूलों का काम मोबाइल पर आना बिल्कुल बंद होना चाहिए : समाजसेवी संदीप सैनी
शिक्षा व्यवस्था में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर उठाए सवाल, बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जताई चिंता
बराड़ा। स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े कार्यों के लिए मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर समाजसेवी संदीप सैनी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ को कम किया जाना चाहिए और स्कूलों से संबंधित अनावश्यक कार्यों को मोबाइल फोन के माध्यम से कराने की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
समाजसेवी संदीप सैनी ने कहा कि जब अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा के लिए हजारों रुपये की फीस ली जाती है और शिक्षकों को नियमित रूप से वेतन दिया जाता है, तो स्कूलों से संबंधित अधिकांश कार्यों के लिए मोबाइल फोन पर निर्भरता क्यों बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, इसलिए उन्हें अनावश्यक मोबाइल आधारित कार्यों में व्यस्त करने के बजाय पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, “स्कूल में करवाओ, फोन पर नहीं।” उनका कहना है कि यदि शिक्षकों को स्कूल परिसर में ही आवश्यक कार्य उपलब्ध कराए जाएं तो वे अपना अधिक समय विद्यार्थियों को पढ़ाने, उनकी समस्याओं को समझने और उनकी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में लगा सकेंगे।
संदीप सैनी ने कहा कि तकनीक आज शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन का अत्यधिक और अनावश्यक इस्तेमाल शिक्षकों के कार्य पर भी असर डाल सकता है और विद्यार्थियों का ध्यान भी पढ़ाई से भटक सकता है।
उन्होंने अभिभावकों की चिंता का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई पर ध्यान दें और मोबाइल का सीमित एवं उपयोगी इस्तेमाल करें। ऐसे में शिक्षण संस्थानों में भी मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को लेकर संतुलित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
समाजसेवी संदीप सैनी ने संबंधित विभाग और स्कूल प्रबंधन से मांग की कि शिक्षकों को दिए जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों तथा मोबाइल फोन के माध्यम से भेजे जाने वाले कार्यों की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अनावश्यक डिजिटल कार्यों से मुक्त कर उन्हें विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही एक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े इस विषय को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर स्कूलों के काम को अनावश्यक रूप से मोबाइल फोन पर भेजने की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की जाएगी।
