हरिद्वार (सुमित सैनी)। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से खरीदा गया करीब नौ लाख रुपये का कृषि ड्रोन अब सवालों के घेरे में आ गया है। जांच के दौरान ड्रोन की बैटरी गायब मिलने से सहकारी समिति प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देश पर 31 मार्च 2024 को जमालपुर कलां सहकारी समिति ने किसानों की फसलों पर दवा, खाद और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए कृषि ड्रोन खरीदा था। ड्रोन संचालन के लिए समिति के एक कर्मचारी को प्रशिक्षण भी दिलाया गया, जिस पर लगभग 30 हजार रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद ड्रोन का उपयोग किसानों के खेतों में नहीं हो सका। मामला तब उजागर हुआ जब सीतापुर निवासी एवं गन्ना विकास समिति ज्वालापुर के उपाध्यक्ष विशेष चौहान ने 8 मई को अपनी फसलों पर ड्रोन से स्प्रे कराने के लिए आवेदन किया। आरोप है कि समिति ने ड्रोन उपलब्ध न होने की बात कहकर उनका आवेदन वापस कर दिया।

इसके बाद विशेष चौहान ने जिलाधिकारी से शिकायत की। शिकायत के आधार पर जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां मोनिका चुनेरा ने जांच के आदेश दिए। जांच के लिए पहुंचे अपर जिला सहकारी अधिकारी एवं जांच अधिकारी केशव प्रसाद को समिति कार्यालय में ड्रोन तो मिला, लेकिन उसकी बैटरी गायब थी।जांच अधिकारी ने ड्रोन आपूर्ति करने वाली कंपनी से बैटरी की रिसीविंग और संबंधित अभिलेख तलब किए हैं। कंपनी से यह भी पूछा गया है कि बैटरी किसे और कब सौंपी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद ड्रोन की खरीद, रखरखाव और उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
क्या बोले जांच अधिकारी
अपर जिला सहकारी अधिकारी एवं जांच अधिकारी केशव प्रसाद ने बताया कि कृषि कार्यों के लिए खरीदे गए ड्रोन की बैटरी मौके पर नहीं मिली है। कंपनी से बैटरी की रिसीविंग मांगी गई है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जांच पूरी कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
